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गुलाब भारत में खेती किए जाने वाले सबसे लोकप्रिय फूलों में से एक है, और इसे फूलों की रानी के रूप में जाना जाता है। भारत में यह मुख्य रूप से कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र, आंद्रा प्रदेश, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, जम्मू और कश्मीर, पश्चिम बंगाल, पंजाब, राजस्थान और बिहार में उगाया जाता है।
गुलाब की खेती पुरे वर्ष की जा सकती है, जिसमें उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में भरपूर धूप रहने पर पूरे वर्ष फूलों का उत्पादन होता है। गुलाब के पौधों को अधिक घूप की आवश्यकता होती है,जिसके लिए प्रति दिन कम से कम 6-8 घंटे अच्छी तेज धुप की आवश्यकता होती है। यह 25 से 30.0 डिग्री सेल्सियस के दिन के तापमान और 15-18.0 डिग्री सेल्सियस के रात के तापमान वाले क्षेत्रों में सबसे अच्छा प्रदर्शन करता है। अधिक मात्रा में फूलों के लिए लगभग 70% से कम आर्द्रता अच्छी होती है। गुलाब की खेती 15.0 डिग्री सेल्सियस से नीचे के तापमान पर की जा सकती हैं, लेकिन फूल की कटाई का समय अधिक हो जाता हैं। 30.0 डिग्री सेल्सियस से अधिक के उच्च तापमान पर भी, कम वाष्पीकरण दर के साथ उच्च आर्द्रता बनाए रख कर गुलाब उगाया जा सकता है। बहुत अधिक नमी रोग और कीट विकास के लिए अनुकूल स्थिति पैदा करती है जबकि इसकी कमी से पत्तियों और तनों और फूलों के आकार में कमी आती है।


गुलाब के विभिन्न प्रकार हैं। 1.हाइब्रिड टी गुलाब 2. हाइब्रिड परपेचुअल 3. फ्लोरिबंडस 4.टी 5. ग्रैंडिफ्लोरा 6. पॉलिएन्थास 7. चाइनीस गुलाब 8 मिनिअटर्स 9. दमास्क 10 बूरबॉन 11 कैबेज गुलाब 12 मोज़ 13 फ्रेंच गुलाब 14. अल्बस 15. नुअज़ेट 16 रोगोसस 17. ऑस्ट्रियाई 18. रैंबलर्स गुलाब के प्रमुख प्रकार जो व्यावसायिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, और उनकी किस्में हैंः हाइब्रिड टी गुलाबः इनमें बड़े फूल (4 सेमी.) लंबे तने (125 सेमी.) होते हैं। उपज 100-200 तने/वर्ग मीटर तक होती है। हाइब्रिड टी गुलाब की कीमत अन्य प्रकारों की तुलना में अधिक होती है। इस समूह की कुछ प्रसिद्ध किस्में सोनिया, विवाल्डी, टिनेके, मेलोडी, डार्लिंग और ओनली लव हैं। फ्लोरिबुंडा गुलाब: इनमें छोटे फूल (2.5 सेमी) और छोटे तने (60 सेमी से कम) होते हैं, लेकिन अन्य प्रकारों की तुलना में इनकी उपज बहुत अधिक होती है। इस समूह की कुछ प्रसिद्ध किस्में फ्रिस्को, मर्सिडीज, जगुआर और फ्लोरेंस। स्प्रे गुलाब: इस किस्म के एक तने में 5-6 फूल लग सकते हैं, लेकिन प्रति वर्ग मीटर उपज कम होती है।इस समूह की कुछ प्रसिद्ध किस्में एवेलियन, मिराबेल, जॉय, ज़ेडिक और निकिता आम तौर पर,हाइब्रिड टी गुलाब की खेती व्यावसायिक रूप से खुले मैदान में की जाती हैं और कटे हुए फूलों के उत्पादन के लिए संरक्षित स्थिति में की जाती है।


गुलाब के पौधों की कलम व्यावसायिक रूप से रूटस्टॉक (मुख्य तने ) पर बडिंग और टॉप ग्राफ्टिंग द्वारा की जाती हैं। आम तौर पर, हाइब्रिड टी गुलाब का व्यावसायिक प्रसार बडिंग द्वारा किया जाता है। चयनित या चुनी गई किस्म की निष्क्रिय आंख को रूटस्टॉक पर कली के रूप में लगाया जाता है। गुलाब में आमतौर पर टी बडिंग या उलटा टी या आई बडिंग का पालन किया जाता है। बडिंग विधि द्वारा तैयार पौधे तेजी से बढ़ते हैं और उत्पादन कम समय में शुरू हो जाता हैं। आमतौर पर उपयोग किए जाने वाले सामान्य रूटस्टॉक्स हैं: रोजा इंडिका, रोजा मल्टीफ्लोरा, रोजा बॉर्बोनियाना, नेटल ब्रियर और रोजा कैनिना। कुछ सुगंधित किस्मो जैसे जैसे पॉलीएन्था, क्लाइम्बर्स, रैम्बलर्स, मिनिएचर, को सुगंधित किस्म और रूटस्टॉक के लिए जड़ कटिंग का उपयोग किया जाता है। आमतौर पर पेंसिल के आकार के 15-20 सेमी लंबे और 3-4 कली वाले स्वस्थ पौधों से एकत्र की जाती है। बेहतर जड़ विकास के लिए उसे आईबीए से उपचारित किया जाता है, जिसे विकसित होने में लगभग 3-4 सप्ताह लगते हैं।


खेत को अच्छी तरह जोतकर तैयार किया जाता है, और रोपण से एक महीने पहले मई-जून के महीने में क्यारियाँ और गड्ढे तैयार किए जाते हैं। खेत में आवश्यकता अनुसार उभरी हुई क्यारियाँ तैयार की जानी चाहिए। बेड का आकार आम तौर पर 60-75 सेमी चौड़ा होता है, जिसके बीच में 30 से 40 सेमी की क्यारी बनाई जाती हैं, जो 20 से 30 सेमी गहरी होती हैं । यदि गड्ढे बनाए जाते हैं, तो अनुशंसित अंतराल पर गड्ढे बनाए जहां गड्ढों का आकार 20-30 सेमी चौड़ा और 20 से 25 सेमी गहरा रखे, उभरी हुई क्यारियाँ टपक सिंचाई प्रणाली और अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में भी अच्छी होती हैं।
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गुलाब के पौधे लगाने का सबसे अच्छा समय शुरुआती बसंत ऋतू का होता है। 6-18 महीने पुराने कलीदार पौधे मई-जून में लगाए जा सकते हैं। ऐसे स्थान जहाँ तापमान मध्यम और सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो वहाँ अक्टूबर-नवंबर और फरवरी-मार्च के महीने में भी पौधे लगाए जाते हैं। अच्छी तरह से तैयार की गई ज़मीन पर 1 x 1 मीटर की दूरी पर पंक्तियों में पौधे लगाए जाते हैं। पौधे 30-50 सेमी गहराई वाले गड्ढों में लगाए जाते हैं। रोपण के समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि कलम मिट्टी से 2-3 सेमी ऊपर हो।


पौधों के आधार या क्यारियों पर 50 से 100 माइक्रोन मोटाई की काली पॉलीथीन से मल्चिंग या गेहूं/चावल के भूसे, लकड़ी का भूरा और अन्य कार्बनिक पदार्थों से लगभग 2-3 इंच मोटी परत बिछा ने से खरपतवारों पर नियंत्रण करने में मदद मिलती है, जिसे पौधों की उचित वृद्धि और विकास सुनिश्चित किया जा सकता है।


पौधे से प्रतिदिन फूल प्राप्त करने और पौधों की अच्छी वृद्धि के लिए जैविक खाद के साथ-साथ रासायनिक उर्वरकों की आवश्यकता होती है। इसलिए खेत तैयार करते समय 8-10 टन अच्छी तरह से विघटित गोबर खाद प्रति एकड़ 200 किलो नीम खल्ली के साथ जैव उर्वरकों और जैव कीटनाशकों उपयोग करना चाहिए। पहले वर्ष के दौरान प्रति एकड़ 240 किग्रा नाइट्रोजन, 80 किग्रा. फास्फोरस और 280 किग्रा पोटाश प्रति एकड़ रासायनिक उर्वरकों की सिफारिश की जाती है, इन उर्वरकों को मासिक अंतराल पर समान भागो में बाट कर उपयोग किया जाना चाहिए। टपक सिंचित फसल द्वारा कम मेहनत में पोषक तत्वों की दक्षता बढ़ाने और उपज में वृद्धि के लिए, उर्वरकों को टपक सिंचाई के द्वारा निश्चित अंतराल में दिया जा सकता है। पानी में घुलनशील उर्वरकों का उपयोग करके निश्चित अंतराल पर अनुशंसित मात्रा किया जाना चाहिए ।


मौसम की स्थिति के आधार पर बारिश नहीं होने पर 5 से 10 दिनों के अंतराल पर सिंचाई प्रदान करें। टपक सिंचित फसल में मौसम की स्थिति के आधार पर प्रति दिन 2 से 4 लीटर पानी देना सुनिश्चित करें।


फूल की कलियों को हटा देना:- पौधों को अच्छी तरह से विकसित करने के लिए रोपण के बाद पहले 4 से 6 महीनों के दौरान फूल की कलिया हटा देना चाहिए। छटाई:- हाइब्रिड टी किस्म में पौधों की 30 से 45 सेंटीमीटर की ऊंचाई तक छंटाई की जाती है। फ्लोरिबंडास को हल्की छंटाई की आवश्यकता होती है। पॉलिएन्थास और ग्रैंडिफ्लोरा के लिए अधिक घनी शाखाओं को पतला करने की आवश्यकता होती है। बेल गुलाब में केवल रोगग्रस्त और क्षतिग्रस्त शाखाओं की छंटाई की जाती है। पिंचिंगः पौधों के शीर्ष भाग अंकुरों या तनों के आधार से निकलने वाली शाखाओ को हटाना पिंचिंग कहलाता है। पौधे के शीर्ष भाग (टिप) को, या कुछ पत्तियों के साथ अंकुर के बढ़ते हिस्से को काट देने से पौधे में अधिक शाखाएं बनती है और वह घना हो जाता है।


मुख्य कीटों में शामिल हैं: लाल मकड़ी कीट, पत्ती लपेटने वाले कीट, सफेद मक्खी, थ्रिप्स, माहू और सूक्ष्म सूत्रकृमि। मुख्य रोगों में शामिल हैं: पाउडरी फफूंद/मृदुरोमिल रोग/चुणीॅ फफूंदी, तुलसिता रोग, फूल और पत्तियों पर सड़न, डाई बैक (टहनी गलन रोग), काला पत्ती धब्बेदार रोग और क्राउन गॉल। रोग और कीट प्रबंधन गुलाब की खेती में दहिया कीट से उत्पादन में कमी आ सकती है। किसानों के अनुभव के अनुसार, फूलों वाली फसलों में दहिया कीट के बेहतर नियंत्रण के लिए मोवेंटो ओडी का छिड़काव करें। घुन और माहू के नियंत्रण के लिए ओबेरोन और सोलोमन का निर्देशानुसार उपयोग करें। थ्रिप्स और सफेद मक्खी के प्रबंधन के लिए जम्प और मोवेंटो ओडी का छिड़काव करें। गुलाब की फसल में पाउडरी फफूंद/मृदुरोमिल रोग/चुणीॅ फफूंदी रोग से उत्पादन में कमी हो सकती है। इस रोग के नियंत्रण के लिए नेटिवो फफूंदनाशक का उपयोग करें, और इसके बाद लूना एक्सपीरियंस का छिड़काव करें। डाई बैक (टहनी गलन रोग) को नियंत्रित करने के लिए भी लूना एक्सपीरियंस का छिड़काव करें। उपयोग करने से पहले, कृपया विभिन्न फसलों में उचित उपयोग के लिए उत्पाद लेबल की जांच करें।


ब्लाइंड शूटः ब्लाइंड शूट का मतलब है कि पौधे का एक तना फूल विकसित करने में विफल रहता है। यह पौधे की बिना फूल वाली शाखा होती है, और पौधे के उचित विकास के लिए इसे हटाया जाना चाहिए। 1000 पीपीएम पर एस्कॉर्बिक एसिड का पत्तियों पर छिड़काव ब्लाइंड शूट की समस्या कम कर देता है। मुड़ी हुई गर्दन: यह गुलाब की फसल में कटाई के बाद होने वाली शारीरिक बीमारी है। इसमें कटे हुए गुलाब के फूल के तने कटाई के बाद मुड़ जाते हैं। मुड़े हुए फूल की गुणवत्ता कम हो जाती है। यह समस्या ऊतकों की नरम वृद्धि, समय से पहले कलियों की कटाई और परिवहन के दौरान पानी की अत्यधिक हानि के कारण होती है। 6.0 पीएच और 10% सुक्रोज के साथ कोबाल्ट नाइट्रेट 200 पीपीएम का उपयोग इस विकार को नियंत्रित करने के लिए बहुत प्रभावी पाया गया और 500 डिग्री सेल्सियस पर मिथाइल ब्रोमाइड का धुआँ करने से मुड़ी हुई गर्दन की समस्या कम हो जाती है। बुल हेड: यह बीमारी आम तौर पर रात में कम तापमान के कारण होती है। यह जिबरेलिन और साइटोकाइनिन के असामान्य उत्पादन के कारण भी होती है। बॉलिंग: अधिक नमी के कारण कली नहीं खुल पाती है, जिससे पंखुड़ियाँ आपस में चिपक जाती हैं, इसे बॉलिंग कहते हैं। यह ठंडे इलाकों और जहां रातों में नमी अधिक होती है वहां देखने मिलती है, अधिक पंखुड़ियों वाले गुलाब बॉलिंग के प्रति संवेदनशील होते हैं।


फूलों की कटाई रोपण के एक वर्ष बाद शुरू होती है। गुलाब का पौधा 5-10 साल तक आर्थिक उपज देता है। कटे हुए फूलों के लिए, तने को सुबह के समय बिना खिले या दो पंखुड़ियों के खुलने पर काटा जाता है। कटाई के तुरंत बाद फूलों के तने को साफ पानी से भरे कंटेनर में रखा जाता है। खुले फूलों के लिए, जो आम तौर पर माला बनाने के लिए उपयोग किए जाते हैं, उन्हें बाजार की दूरी के आधार पर आधे खुले या पूरी तरह से खुले अवस्था में काटा जाता है। तेल या गुलाब जल निकालने के लिए फूलों को आम तौर पर सूर्योदय से पहले सुबह जल्दी काटा जाता है और कटाई के तुरंत बाद प्रक्रिया शुरू की जाती है। कटाई के बाद, गुलाब को वर्गीकृत कर पैकट बनाकर फ्रीज वाले वाहन से भेजा जाना चाहिए। उपज:- किस्म रोपण की सघनता और पर्यावरण की स्थितियों पर निर्भर करती है। हाइब्रिड टी गुलाब में औसतन प्रति पौधा लगभग 10-20 तने या प्रति वर्ग मीटर 60-70 फूल प्राप्त होते हैं। उगाई गई किस्म के आधार पर ढीले फूलों की उपज प्रति एकड़ लगभग 8 से 20 क्विंटल होती है।


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