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जेमिनी रोग विषाणु के एक परिवार से आया है, जो पौधों में बीमारियों का कारण बनता है। यह रोग बहुत घातक होता हैं जो पौधों को नुकसान पहुंचाते हैं।
जैमिनी विषाणु रोग के सामान्य लक्षण पीला मोजेक, पीला कर्लिंग, स्टंटिंग, छोटे धब्बे दिखाई देते है और पैदावार कम हो जाती है , प्रारंभिक चरण में लघु अंतराफलक और पोधो की वृद्धि का रुक जाना सबसे अधिक देखा जाता है।
यह विषाणु यांत्रिक तरीकों से प्रसारित नहीं होता है। यह कीड़ों द्वारा फैलता है। लीफ हॉपर ( टिड्डे ) और सफ़ेद मक्खी इस बीमारियों के फैलने के मुख्य कारण होते है|


यह कीट अपने 10-12 दिनों के जीवन काल मे रोग वाहक का कार्य करता हैं |
किसानों के अनुभव के अनुसार, सफेद मक्खियों और जैसिड्स/लीफहॉपर्स (पत्ती फुदक्खा कीट) के बेहतर नियंत्रण के लिए सोलोमन, मोवेन्टो ओडी और ट्रांस का प्रयोग करें। उपयोग करने से पहले, कृपया विभिन्न फसलों में उचित उपयोग के लिए उत्पाद लेबल की जांच करें।
अधिकतर यह विषाणु सोयाबीन, कपास, आलू और टमाटर जैसी कई सब्जियों की फसलों को प्रभावित करता है|

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1. प्रतिरोधी किस्मों और वायरस/कीट रहित पौधों का उपयोग करें: खेती की शुरुआत ऐसे बीजों और पौधों से करें जो जेमिनी वायरस के प्रति प्रतिरोधी हों। स्वस्थ और कीट-मुक्त पौधों का ही रोपण करें। 2. खुले खेतों में युवा पौधों की सुरक्षा करें: पौधों को सफेद मक्खी और लीफहॉपर जैसे कीटों से बचाने के लिए नेट या पंक्ति आवरण का उपयोग करें। संक्रमित पौधों को हटाएं और नष्ट करें: रोगग्रस्त पौधों की पहचान कर उन्हें खेत से निकालकर जला दें या गड्ढे में दबा दें। कीटों के प्रबंधन के लिए नियमित निगरानी करें। 3. कीट नियंत्रण के लिए अनुशंसित कीटनाशकों का प्रयोग करें: सफेद मक्खी और लीफहॉपर (पत्ती फुदक्खा कीट) जैसे वायरस वाहक कीटों को नियंत्रित करने के लिए उचित कीटनाशकों का छिड़काव करें। 4. फसल चक्र अपनाएं: एक ही फसल को लगातार न बोएं। 2-3 महीने तक फसल न बोने से वायरस और कीटों की संख्या कम होती है। 5. समेकित कीट प्रबंधन अपनाएं:वायरस, उसके वाहक कीटों और फसल की जैविक व पारिस्थितिक जानकारी के आधार पर एकीकृत कीट प्रबंधन रणनीति अपनाएं।